Pakistan FATF

पाकिस्तान का आतंक के प्रति प्रेम एक बार फिर सामने आया है। बता दें, आतंकी निगरानी सूची से पाकिस्तान ने 3800 नाम हटा दिए हैं।

पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति रुख देखकर हमेशा यह सवाल उठते रहते हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करता है। कई बार ऐसे सबूत भी सामने आए हैं जब पाकिस्तान का आतंकियों के प्रति प्रेम सामने आया हो। वहीं अब यह जानकारी मिल रही है कि पाकिस्तान ने आतंकी निगरानी सूची यानी टेररिस्ट वॉच लिस्ट से 3800 नाम हटा दिए हैं। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जकी-उर्रहमान लखवी का नाम भी नहीं है।

इस लिस्ट को लेकर वेबसाइट Castellum.AI ने ताजा जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार आतंकी निगरानी सूची में जहां 2018 में 7600 नाम शामिल थे तो वहीं अब घटकर 3800 के नीचे पहुंच गए हैं।

टेररिस्ट वॉचलिस्ट में आतंकी जकी-उर्रहमान लखवी का नाम भी नहीं है। हालांकि, अभी इस बात की सूचना नहीं है कि क्या लख्मी का नाम इस लिस्ट में शामिल था। लेकिन फरवरी 2018 के पाकिस्तान के राष्ट्रपति हस्ताक्षर वाले अध्यादेश में यह बात शामिल थी कि यूएन के अनुसार जो लोग आतंकी है उन्हें पाकिस्तान नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी ने लिस्ट में रखा है। मगर इस ताजा लिस्ट में लखवी का नाम शामिल नहीं है।

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Castellum.AI का डाटा यह दर्शाता है कि 9 मार्च से 27 मार्च के बीच आतंकी निगरानी सूची से पाकिस्तान ने 1069 नाम हटाए हैं। जिसके बाद इन नामों को D- नोटिफाइड लिस्ट में शामिल किया गया है। इस D-नोटिफाइड लिस्ट में नाम दर्शाने का मतलब यह होता है कि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इन लोगों के नाम को आतंकी निगरानी सूची से हटा दिया हैं।

बता दें, करीब 800 नाम 27 मार्च के बाद से टेररिस्ट वॉचलिस्ट से हटाकर डी-नोटिफाइड लिस्ट में डाल दिये गये हैं। इस तरह पाकिस्तान ने पिछले 18 महानों में बिना किसी नोटिफिकेशन या सूचना के आतंकी निगरानी सूची से 3800 नाम हटा दिये हैं।

पाकिस्तान क्यों हटा रहा सूची से नाम

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हालांकि अब तक इस बात की जानकारी तो नहीं है कि पाकिस्तान ऐसा क्यों कर रहा है लेकिन माना जा रहा है कि अपना दामन बचाने के लिए पाकिस्तान लगातार आतंकियों के नाम लिस्ट से हटाते जा रहा है। दरअसल, आतंकी निगरानी सूची में जितने भी नाम है उनके खिलाफ पाकिस्तान की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई है। लेकिन FATF पाकिस्तान की करतूतों पर अपनी कड़ी निगाह रखता है। ऐसे में पाकिस्तान को डर है कि कहीं ऐसे FATF निगरानी सूची में शामिल लोगों पर एक्शन ना लेने के कारण फंडिंग पर कोई कड़ा फैसला न ले ले।

आपको बता दें, पाकिस्तान लगातार लिस्ट में शामिल लोगों का बचाव करता रहा है। सूत्रों की मानें तो, पाकिस्तान ने FATF से बताया था कि इन लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और स्थानी पुलिस स्टेशनों में इनकी नियमित रिपोर्ट रखी जाती है। जिसपर FATF ने यह कहा था कि अगर इन पर निगरानी रखी जा रही है तो इन्हें कालाधन की फंडिंग पर भी रोक लगाई जा रही है तो फिर लोगों की आय का स्त्रोत क्या है। इस पर पाकिस्तान की ओर से ये जवाब दिया गया कि अपनी आय के लिए यह लोग जो भी करना चाहिए उसके लिए स्वतंत्र हैं।

गौरतलब है कि, FATF की फंडिंग के बिना पाकिस्तान बदहाल हो जाता है और उसे FATF को दिखाने के लिए आतंकियों पर कड़ा एक्शन करने का ढोंग करना पड़ता है। हालांकि बावजूद इसके कई बार ऐसे जानकारियां सामने आती रहती है कि पाकिस्तान जो कहता है वह असल में ऐसा कर नहीं रहा। यही वजह है कि पाकिस्तान को उसकी फंडिंग पाने के लिए नाको चने चबाने पड़ते हैं।

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