nirjala ekadashi pooja

निर्जला एकादशी काफी फलदायक होती है। इस दिन रखा गया व्रत व्यक्ति को कई तरह से सुख देता है लेकिन इसे करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।

वैसे तो हर व्रत की अपनी एक मान्यता और अपना महत्व होता है जिसका व्यक्ति को अनुसरण करना चाहिए। साथ ही कुछ सावधानी बरतने की भी बात कही जाती है। आज निर्जला एकादशी व्रत है जो अपने आप में काफी महत्व रखती है। माना जाता है इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। ये तो सभी जानते हैं कि एकादशी के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने चाहिए। विष्णु पुराण के मुताबिक, एकादशी पर चावल खाने से मिलने वाला पुण्य नष्ट हो जाता है लेकिन चावल के अलावा भी पांच ऐसी वस्तु है जिनका सेवन व्रत करने वाले के पारिवारिक सदस्यों और व्रती को खुद भी नहीं करना चाहिए वरना जीवन में कई तरह की दिक्कतों का सामना उन्हें करना पड़ सकता है। तो चलिए बताते हैं क्या है वो 5 चीजें जिससे आपको बनाई रखनी है आज दूरी…

Nirjala Ekadashi: जानें, पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

  • इस दाल का न करें सेवन

ग्रंथों की मानें तो, एकादशी के दिन गलती से भी मसूर की दाल को नहीं खाना चाहिए। मसूर की दाल को अशुभ माना जाता है इसलिए व्रत के पारण में या जो व्यक्ति व्रत ना भी करें उसे भी निर्जला एकादशी के दिन मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • सेम से भी बनाए दूरी

ग्रंथों के मुताबिक, इस दिन सेम का प्रयोग खाने में नहीं करना चाहिए। मान्यता है इस दिन सेम खाने से संतान की हानि होती है इसलिए व्रती के परिवार और सभी सदस्यों को निर्जला एकादशी के दिन सेम खाने से बचना चाहिए। व्रती को पारण के द‍िन इसका भूलकर भी सेवन नहीं किया जाना चाहिए अन्यथा संतान संबंधी कई दुःखों का सामना व्यक्ति को करना पड़ सकता है।

  • लहसुन-प्‍याज भी खाना वर्जित

ग्रंथों की माने तो, निर्जला एकादशी के दिन लहसुन और प्याज खाना भी वर्जित होता है। इन्हें तमोगुण वर्धक माना जाता है। यह काम के भाव को बढ़ाते हैं। शास्त्रों में इसे राक्षसी भोजन भी माना गया है इनकी उत्पत्ति राहु नामक एक राक्षस के खून से हुई है इसलिए इनमें तिक्षण गंध होती है, यह उत्तेजना, क्रोध और अशांति, हिंसा को पैदा करते हैं इसलिए व्रत के पारण के दिन प्याज, लहसुन का इस्तेमाल गलती से भी नहीं करना चाहिए।

  • मीठा पान खाना भी है पाप

ग्रंथों के मुताबिक, इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति या उसके घर के सदस्यों को मीठे पान का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसका कारण यह है कि भगवान विष्णु की पूजा में मीठा पान चढ़ाया जाता है और भगवान को अर्पित किया जाता है। इसलिए इस दिन मीठा पान खाना वर्जित माना जाता है।

  • न करें साग और मूली का सेवन

ग्रंथों के मुताबिक इस एकादशी के दिन गलती से भी साग या मूली का सेवन नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह दोनों ही भूमि के नीचे पाए जाते हैं। इन्हें अशुद्ध माना जाता है। इनका सेवन जीवन में कई दिक्कतों का कारण बन सकता है। यही कारण है कि व्रत रखने वाले या फिर परिवार के अन्य सदस्यों को मूली और साग नहीं खानी चाहिए।

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