देश में जारी कोरोना संकट के बीच तीन राज्य सरकारों ने कांवड़ यात्रा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बैठक के बाद लिया गया।

कोरोना वायरस का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। दुनिया के ज्यादातर देश इस वायरस के संकट से जूझ रहें हैं और लगातार इस वायरस का तोड़ निकालने के लिए वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। हालांकि अब तक किसी को पूर्ण रूप से सफलता हासिल नहीं हुई है। इस बीच कोरोना का असर सावन में होने वाली कांवड़ यात्रा पर भी पड़ रहा है। हर साल सावन के महीने में शुरू होने वाली पवित्र कांवड़ यात्रा इस बार कोरोना संकट के चलते प्रभावित हो रही है। दरअसल तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करें इस बार कांवड़ यात्रा नहीं कराने का फैसला लिया है।

बता दें, इस पवित्र कांवड़ यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्से से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की जिसमें यह फैसला लिया गया है। कांवड़ यात्रा को लेकर हुई इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शामिल थे। बैठक के बाद तीनों मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से यह फैसला लिया कि इस साल कांवड़ यात्रा कराने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

क्यों लिया गया ये फैसला

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ये सभी राज्य कोरोना वायरस संकट से जूझ रहे हैं। इन राज्यों में लगातार कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है जिसे देखते हुए ही सरकारों ने ये फैसला लिया है।

लाखों की संख्या में जुटते हैं कांवड़िए

इस यात्रा के दौरान कांवड़ियों की संख्या लाखों में होती है। इनके लिए राज्य सरकार को पैदल यात्रा से लेकर जगह-जगह पर खाना, पानी और विश्राम स्थल की तैयारियां करनी पड़ती है। यह कावड़ यात्रा बेहद खास और चर्चा में रहती है क्योंकि भक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार से गंगाजल भरकर अपने यहां शिव मंदिरों में पहुंचाते हैं। बता दें, यह कावड़ यात्रा बहुत ही भव्य होती है हालांकि यह पहली बार है जब सैकड़ों वर्षो की परंपरा में कांवड़ यात्रा को रद्द किया जा रहा है। यह यात्रा 5 जुलाई से 17 जुलाई के बीच होती थी, जो इस बार नहीं होगी।

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