JNU

JNU (जेएनयू) में छात्रों को कमोबेश 9 कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं। संस्कृत परंपरा के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों को अवगत कराने के लिए कराए जा रहे हैं ये कोर्स।

JNU (जेएनयू) में छात्रों को कमोबेश 9 कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं जो 15 से 20 घंटे के समय के होंगे। इन कोर्स को कराने के पीछे का उद्देश्य संस्कृत परंपरा के विभिन्न क्षेत्रों जैसे वेदांत, विधि, कविता, दर्शन और व्याकरण से छात्रों को अवगत कराना है। इसे लेकर जेएनयू के वाइस चांसलर एम.जगदीश कुमा ने कहा, “जल्द ही हम संस्कृत भाषा और साहित्य में ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम लॉन्च करने जा रहे हैं। समर स्कूल एक परफेक्ट पायल प्रोजेक्ट हो सकता है।”

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आपको बता दें, ये कोर्सें यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ संस्कृत ऐंड इंडिक स्टडीज की फैकल्टी पढ़ा रही हैं। ऑनलाइन समर स्कूल के तौर पर जिन डिसिप्लिन की पढ़ाई होगी उनमें संस्कृत बौद्ध पाली टेक्स्ट, कश्मीर शैविजम, संस्कृत की कविताएं, विद्यास्थानों कोलेकर अद्वैत का परिदृश्य, अद्वैत वेदांत सिस्टम, कानूनी सिस्टम, महाभारत पर पाठ, संस्कृत व्याकरण और न्याय वैसिका दर्शन शामिल है।

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5 से 30 जून, 2020 तक इन ऑनलाइन कोर्सों को हफ्ते में दो बार कराया जाएगा। इस दौरान कोर्स इंचार्ज एक-एक लाइन टेक्स्ट पढ़ाएंगे। वहीं जिन छात्रों की क्लासों में 70 फीसदी हाज़री रही तो उन्हें कोर्स के आखिर में एक प्रतिभागिता सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

जगदीश कुमार ने कहा, “दुनिया भर में संस्कृत सीखने को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। इंग्लैंड में कई स्कूलों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। इसके अलावा कैंब्रिज, हार्वर्ड और ट्रिनिटी कॉलेज समेत दुनिया की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटियों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। जर्मनी में छात्र संस्कृत को एक ऐच्छिक विषय के तौर पर ले सकते हैं। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसी नई टेक्नॉलजी के लोकप्रिय होने के साथ ही संस्कृत सीखने से अहम जानकारी और स्किल हासिल हो सकता है। इसलिए संस्कृत भाषा और साहित्य को पढ़ाना एवं लोकप्रिय बनाना बहुत जरूरी है।”

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