Vishnu Bhagwan

एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सारे पाप दूर हो जाते हैं साथ ही भगवान विष्णु की कृपा भी बरसती है।

वैसे तो सभी धर्मों के अपने-अपने त्यौहार और व्रत पूजन है जिनका अपना एक विशेष महत्व है। इसी तरह एकादशी का व्रत भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन रखे गए व्रत से श्री हरि विष्णु मनुष्य के सभी पाप का नाश कर देते हैं लेकिन इस व्रत को करने के कुछ खास नियम भी हैं जिनका अगर ध्यान न दिया जाएं तो व्यक्ति को व्रत का फल नहीं मिलता। तो क्या है इस व्रत के नियम और किन बातों का आपको रखना है ख्याल।

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  • क्या है इस व्रत की धार्मिक मान्‍यता

पौराणिक कथा के मुताबिक, महर्षि मेधा ने माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। मान्‍यता ये है कि महर्षि मेधा चावल और जौ के रूप में उत्पन्न हुए। इसी कारण चावल और जौ को जीव माना जाता हैं। कथा के मुताबिक पृथ्वी में जिस दिन महर्षि मेधा का अंश समाया था उस दिन एकादशी की तिथि थी। इसी कारण एकादशी के दिन चावल नहीं खाया जाता। ऐसा माना जाता है कि इस दिन (एकादशी) पर चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने जैसा है।

  • क्‍या है इसका वैज्ञानिक तथ्‍य

वैज्ञानिक तथ्‍यों के मुताबिक, चावल में जल तत्व की मात्रा ज्यादा होती है। वहीं जल पर चंद्रमा का अधिक असर पड़ता है। चावल का सेवन शरीर में जल की मात्रा को बढ़ाता है साथ ही इससे मन विचलित और चंचल भी होता है। वहीं जब इसके सेवन से मन के चंचल होता है तो व्यक्ति व्रत के नियमों का पालन नहीं कर पाता। यही कारण है क‍ि एकादशी के दिन चावल से बनी चीजों का सेवन करना वर्जित है।

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  • भूलकर भी न करें ये काम

एकादशी के लिए धर्म शास्‍त्रों में कुछ खास बातों को ध्‍यान रखने को कहा गया है। माना जाता है एकादशी के द‍िन मांस, मछली, लहसुन, प्‍याज और अंडा नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा व्रत रखने वाले व्यक्ति को कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। क‍िसी के प्रति मन में ईर्ष्‍या-द्वेष की भावना भी नहीं आनी चाहिए इसके साथ ही किसी के साथ वाद-विवाद करने से भी बचना चाहिए।

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