हनुमान जी की पूजा करते समय कुछ सावधानी बरतनी जरूरी है। ऐसी आठ परिस्थितयां हैं जिसमें आपको भूलकर भी हनुमान जी की पूजा नहीं करनी है।

हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जिन्हें आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन कई ऐसी भी परिस्थितियां हैं जब पवन पुत्र हनुमानजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। तो चलिए बताते हैं आपको कौन सी हैं वो परिस्थितियां…

गंदे और फटे हुए कपड़ों में

पवन पुत्र हनुमान जी की पूजा के दौरान साफ सफाई का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में कभी भी गंदे और फटे हुए कपड़ों में हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

बगैर नहाए

बिना नहाए देवी देवताओं की पूजा अर्चना नहीं करनी चाहिए। जो भी व्यक्ति ऐसे में बिना नहाए हनुमान जी की पूजा करता है या फिर उनकी प्रतिमा को छूता है तो उसे नकारात्मक फल मिलता है।

शवयात्रा से वापस आने के बाद

जब भी आप किसी शव यात्रा से लौटे हो या उसका हिस्सा बने हो तो बिना शुद्ध हुए यानी बिना नहाए किसी देवी-देवताओं को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस नियम को हनुमान जी की पूजा के वक्त का ख्याल रखना चाहिए।

अशुद्ध अवस्था में न करें पूजा

हनुमान जी की पूजा के दौरान शुद्धता जरूरी है। कभी भी अशुद्ध अवस्था में हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए। दिन भर काम करने के बाद घर आने पर सबसे पहले स्नान करना चाहिए उसके बाद हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।

मुंह को रखें साफ

पूजा के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि आपका मुंह पूरी तरह साफ हो। अगर आपके मुंह में किसी प्रकार का जूठन रह गया हो तो अच्छी तरह खुला करके फिर पूजा करें।

सूतक के समय

सूतक काल में हनुमान जी की पूजा को वर्जित माना जाता है। परिवार में जब भी किसी की मृत्यु हो या फिर जब तक सूतक काल प्रभावी हो हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

संतान होने पर

परिवार में संतान के जन्म से लेकर अगले 10 दिनों तक हनुमान जी समेत अन्य देवी देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए। परिवार में जब संतान होती है तो उस समय को सुआ कहा जाता है।

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