Chanakya Niti

चाणक्य ने 6 ऐसे लोगों के बारें में बताया है। जो कभी दूसरों का दुख नहीं समझते।

आचार्य चाणक्य ने जीवन रूपी रथ को सफलतापूर्वक चलाने के लिए सही-गलत, अच्छे-बुरे का ज्ञान होना जरूरी बताया है। चाणक्य की माने तो 6 तरह के लोग और दो तरह की चीजें कभी किसी के सुख-दुख को नहीं समझते। इन लोगों को जो करना होता है वो करके रहते हैं तो आइए जानते हैं इन 8 के बारे में….

राजा वेश्या यमश्चाग्निस्तस्करो बालयाचकौ।

परदुःखं न जानन्ति अष्टमो ग्रामकण्टकः।।

इन चार बातों को जान लिया, तो हमेशा बचा रहेगा आपका पैसा

  • चाणक्य के अनुसार, राजा यानी शासन प्रशासन के लोग किसी की भावनाओं और दुख को नहीं समझते। वो अपने कठोर स्वरूप को अख्तियार कर नियम और सत्य के आधार पर फैसला लेते हैं।
  • आचार्य चाणक्य ने वैश्या का जिक्र भी इस श्लोक में किया है। उनका कहना है वैश्या केवल अपने पैसों से मतलब रखती है उसे किसी दूसरे व्यक्ति के दुख से कोई मतलब नहीं होता।
  • चाणक्य की माने तो यमराज का भी लोगों की भावना से कोई संबंध नहीं होता। समय आने पर यमराज किसी को नहीं बख्शते। उन्हें किसी का दुख दर्द नहीं दिखता क्योंकि अगर वह किसी के दर्द को समझेंगे तो किसी प्राणी की मृत्यु ही नहीं होगी।
  • आचार्य चाणक्य ने इस प्रवृत्ति में आग को भी शामिल किया है। क्योंकि आग की चपेट में आने वाले व्यक्ति के दुख, भावना, आचरण को नहीं देखती, उसकी संपर्क में आने वाले हर किसी को जलाकर राख कर देती है। यह जीवन के लिए जितना जरूरी है उतना घातक भी है।
  • इस क्रम में चाणक्य ने चोरों को भी शामिल किया है। आचार्य चाणक्य ने कहा है कि चोर किसी की पीड़ा को नहीं समझते। उनका लक्ष्य केवल चोरी करना होता है। उसके द्वारा की गई चोरी से सामने वाले को कितनी भी बड़ी दिक्कत हो उसे कोई मतलब नहीं होता।
  • चाणक्य ने बच्चों को भी इसमें शामिल किया है उनका कहना है बच्चों को भी दूसरों के दुख और दर्द से कोई मतलब नहीं होता क्योंकि उनकी बुद्धि का विकास नहीं हुआ होता है। इन भावनाओं से वह काफी दूर होते हैं।
  • याचक यानी मांग कर अपना पालन करने वाले दूसरों के दुख को नहीं समझते। उन्हें बस अपनी जरूरत को पूरा करना होता है। ऐसे लोग कभी दूसरों के दुख दर्द को नहीं समझते हैं।
  • कांटे की प्रवृत्ति चुभने वाली होती है। इसे भी चाणक्य ने इस क्रम में शामिल किया है। कांटा भी किसी का दुख-दर्द नहीं देखता।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here